अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर संदेह

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर सस्पेंस जारी है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत शुरू होने का दावा किया है, वहीं ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की है। इसी बीच सीजफायर को लेकर अमेरिका के एक प्लान का खुलासा हुआ है। अमेरिका ईरान के एक ऐसे कट्टरपंथी को अपने पाले में करना चाहता है, जो आने वाले वक्त में उसके लिए काम करे। इसके लिए ट्रंप प्रशासन उस अधिकारी को मनाने में जुट गया है। अधिकारी का नाम है- मोहम्मद बी गालिबफ। ट्रंप प्रशासन गालिबफ को कन्फिडेंस में ले रहा है। ट्रंप प्रशासन को लगता है कि गालिबफ के जरिए ही ईरान से उसका हित सध सकता है। गालिबफ से बात करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी भेजने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर सीधे हमले किए गए, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। गत 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष मंगलवार 24 मार्च को 25वें दिन में प्रवेश कर गया और दोनों पक्षों की ओर से बयानों में इतना विरोधाभास है कि ये किसी पहेली की तरह लग रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले की समय-सीमा बढ़ाकर पांच दिन कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिससे युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे बाजार को प्रभावित करने की रणनीति बताया है। उधर इजराइल ने भी तेहरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिनमें रिहायशी इलाके भी शामिल हैं। इससे आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर 20 से ज्यादा देशों, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त बयान जारी कर इन घटनाओं की निंदा की है। यह समुद्री रास्ता लगभग बंद हो चुका है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 24 मार्च की सुबह लगभग 4 प्रतिशत बढ़ गईं, पिछली सत्र में गिरावट के बाद यह सुधार हुआ। यह तेजी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ती अनिश्चितता के चलते आई। अमेरिका की ओर से लगातार बातचीत की बात की जा रही है लेकिन ईरान मानने को तैयार नहीं है।



