अमेरिका के लिंकन जहाज ने डाला लंगर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव इस वक्त चरम पर है। पहले तो ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब कर रखे थे। एक वक्त में तो ऐसा लगा था कि अमेरिकी सेना किसी भी वक्त ईरान में घुस जाएगी। हालांकि तब ऐसा नहीं हुआ और ईरान के अंदर प्रदर्शन भी धीरे-धीरे खत्म होने लगे। वो बात अलग है कि ईरान-अमेरिका की जुबानी जंग तब भी जारी रही। इससे ये तो साफ हो गया कि अमेरिका को दिक्कत वहां की सत्ता से है जिसे उखाड़ फेंकने का ब्लू प्रिंट अमेरिका तैयार कर चुका है। उसने अपना तैरता हुआ किला यानि अब्राहम लिंकन समंदर में उतार दिया है। खबरें ये हैं कि तीन युद्धपोतों के साथ ये ईरान की ओर बढ़ रहा है। यूएसएस अह्माम लिंकन का अचानक रडार और ट्रैकिंग सिस्टम बंद करना एमिशन कंट्रोल रणनीति का हिस्सा है। एआईएस ट्रांसपोंडर बंद होने से आम लोग, ऐप्स और ओपन-सोर्स ट्रैकिंग सिस्टम इस विमानवाहक पोत की लोकेशन नहीं देख पाते। जनवरी, 2026 में जब ईरान ने पूर्ण युद्ध की चेतावनी दी है, तब अपनी सही स्थिति छिपाना अमेरिकी नौसेना की पहली सुरक्षा परत है। इससे ईरान को अपने लंबी दूरी के कैरियर किलर मिसाइलों के लिए तय लक्ष्य नहीं मिलता। अमेरिका हर सैटेलाइट से नहीं छिप सकता, लेकिन ट्रांसपोंडर बंद होने से ईरान की निगरानी काफी मुश्किल हो जाती है। ईरान अपने और कमर्शियल सैटेलाइट डेटा से अरब सागर में अमेरिकी जहाजों पर नजर रखता है। जब जहाज डार्क होता है, तो ईरानी सेना को उसकी पहचान और सटीक स्थिति तय करने में कई घंटे लग सकते हैं, जो आधुनिक युद्ध में बहुत बड़ा समय होता है। यह कदम सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव भी है। 26 जनवरी, 2026 तक यूएस लिंकन बंगाल की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच कहीं मौजूद मानी जा रही है। इतिहास बताता है कि अमेरिका किसी बड़े सैन्य अभियान से पहले अपने विमानवाहक युद्धपोतों को साइलेंट मोड पर डाल देता है।



