रामनवमी को शपथ लेंगे बालेन्द्र शाह

नेपाल की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। हाल ही में नेपाल में चुनाव हुए हैं। 35 साल के युवा नेता बालेंद्र शाह अब देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, लेकिन उनकी शपथ की तारीख ने इस खबर को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। बालेंद्र शाह 27 मार्च को राम नवमी के दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह फैसला सिर्फ एक तारीख तय करना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, शाह ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत जनकपुर से की थी, जिसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। अब राम नवमी के दिन शपथ लेना उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम नेपाल की जनता की आस्था को स्वीकार करने का संकेत है। बालेंद्र शाह का यह कदम सीधे तौर पर लोगों की भावनाओं से जुड़ने की कोशिश है। बालेन्द्र शाह के समर्थक युवा हैं और राजशाही के खिलाफ रहे हैं, इसलिए इसे पुराने धार्मिक राजतंत्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। नेपाल हमेशा से अपनी अलग राष्ट्रीय और धार्मिक पहचान बनाने की कोशिश करता रहा है, जिसमें रामायण की परंपरा को भी वह अपने तरीके से देखता है।
कई लोगों का मानना है कि बालेंद्र शाह इस फैसले के जरिए यह संकेत दे रहे हैं कि वह हिंदू पहचान से दूरी नहीं बना रहे, लेकिन वह उस तरह के हिंदुत्व की बात भी नहीं कर रहे जो राजशाही के दौर में था, जब राजा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता था। बालेंद्र शाह का यह कदम सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक संतुलित राजनीतिक संदेश है, बालेंद्र शाह को बालेन के नाम से भी जाना जाता है। वह नेपाल की नई पीढ़ी का चेहरा हैं।



