लेखक की कलम

असम में कांग्रेस को बड़ा झटका!

कांग्रेस की बागडोर भले ही मल्लिकार्जुन खरगे के हाथ मंे थमा दी गयी है लेकिन अब भी सभी की निगाहें सोनिया और राहुल गांधी की तरफ रहती हैं। सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा सक्रिय नहीं रहती हैं लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को अपनी निगाह चैकस रखनी चाहिए। पूर्वोत्तर भारत में कभी कांगे्रस का मजबूत गढ़ रहा असम नेतृत्व की उदासीनता के चलते ही उसके हाथ से चला गया है। हिमंता विश्वशर्मा कांग्रेस के ही नेता थे। अब वहां विधानसभा चुनाव होने हैं। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के चीफ भूपेन बोरा ने कांगे्रस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। भूपेन बोरा 2006 से 2016 तक विधायक रहे। इस बीच उन्हंे बेस्ट एमएलए अवार्ड भी मिला लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को उनकी चिंता नहीं है। भूपेन बोरा कहते हैं कि उन्हांेने राहुल गांधी से कहा कि सर मुझे बहुत अपमान महसूस हो रहा है लेकिन राहुल गांधी ने उस पर गौर ही नहीं किया। इसके विपरीत राहुल ने कहा कि मुझे भी बहुत अपमान सहना पड़ रहा है। अब ऐसे हालात में कोई भी स्वाभिमानी नेता पार्टी छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार विधानसभा चुनाव से पहले असम में कंाग्रेस को यह बड़ा झटका लगा है। बोरा अपनी जन्मभूमि रंगानाडी से चुनाव लड़ना चाहते हैं। यह उनका अधिकार है। बोरा 22 फरवरी को भाजपा मंे शामिल होंगे।
पूर्व एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा, जब मैंने राहुल गांधी से कहा, सर, मुझे बहुत अपमान महसूस हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें भी बहुत अपमान सहना पड़ रहा है। उस क्षण मुझे लगा कि मेरे अपमान का कोई महत्व नहीं है। लेकिन मैं इतना सहन नहीं कर सकता, मुझमें इसे सहने की इतनी क्षमता नहीं है। उनके इस बयान पर असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा कहते हैं, …प्रियंका गांधी के असम कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार, 9 तारीख को एक बैठक हुई थी जिसमें यह चर्चा हुई कि हमें जल्द से जल्द गठबंधन सरकार बनानी होगी और इतने कम समय में केवल भूपेन बोरा ही ऐसा कर सकते हैं। योजना यह थी कि प्रियंका गांधी के यहां पहुंचते ही सभी गठबंधन सहयोगी एक साथ हाथ उठाकर गठबंधन की घोषणा कर देंगे। मुझे भी इस अवसर का लाभ उठाने में खुशी हुई… अब भी गठबंधन होगा। गौरव गोगोई ने गठबंधन इसलिए तोड़ा क्योंकि अगर गठबंधन सरकार बनती तो वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाते… उन्हें डर था कि अगर गठबंधन जारी रहा तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा… अब तो गठबंधन होगा ही… असम कांग्रेस के स्तंभ रहे कई वरिष्ठ नेताओं को अपमानित होना पड़ा है… वे बचे हुए नेताओं को मनाने की कोशिश करेंगे।
विधानसभा चुनाव से पहले असम में पाला बदलने का खेल जारी है। इस बीच, सीएम हिमंता विश्वशर्मा ने दावा किया था कि कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेन बोरा का साथ उन्हें मिलने वाला है। भूपेन बोरा, जल्द भाजपा में शामिल होने वाले हैं। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री हिमंता ने भूपेन बोरा को असम कांग्रेस में आखिरी हिंदू नेता बताया। हिमंता विश्वाशर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, भूपेन बोरा असम कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उभरे अंतिम प्रमुख हिंदू नेता रहे हैं। उनके निमंत्रण पर उनसे भेंट करूंगा। मेरी हार्दिक इच्छा है कि वे भाजपा परिवार में शामिल होकर राष्ट्र और असम की सेवा के हमारे संकल्प को और सशक्त करें। जान लें कि भूपेन बोरा ने गत 16 फरवरी, 2026 को कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दिया था। असम के सीएम हिमंत विश्वशर्मा के मुताबिक, भूपेन बोरा जल्द ही (22 फरवरी) औपचारिक तौर पर भाजपा में शामिल होंगे। बोरा 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी एपीसीसी के चीफ रहे हैं। इसके अलावा, वह बिहपुरिया सीट से 2 बार विधायकी का चुनाव जीत चुके हैं। भूपेन बोरा असम सरकार में संसदीय सचिव के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने खुद को दरकिनार किए जाने और कांग्रेस के कामकाज से असंतोष को लेकर कांग्रेस से वर्षों पुरना नाता तोड़ा है।
गौरतलब है कि भूपेन बोरा 2006 से 2016 तक विधायक रहे हैं। बोरा को उनके विधायी कार्यकाल के दौरान उनके कार्यों के लिए बेस्ट एमएलए अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इलाके के लोगों में उनकी अच्छी पैठ हैं। इस प्रकार असम कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सीनियर नेता भूपेन कुमार बोरा ने इस्तीफा देकर सनसनी मचा दी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए भेजा था। पार्टी के शीर्ष नेता उन्हें मनाने में लगे रहे। वहीं, भूपेन बोरा मीडिया के सामने आए थे। उन्होंने दावा किया कि सीएम शर्मा भी उनसे मिलना चाहते हैं। भूपेन बोरा ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया था कि उन्होंने अभी इस्तीफा वापस नहीं दिया है, बल्कि परिवार और सहयोगियों से सलाह-मशविरा करने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा, इस्तीफा भेज दिया गया है, लेकिन आलाकमान ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कांग्रेस से अपने इस्तीफे पर भूपेन कुमार बोरा ने कहा, कल (सोमवार), नागांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया मेरे घर आए। उनके सामने, मैंने बाकी सभी नेताओं से कहा कि वे मेरा इस्तीफा लेटर देखें और मैंने प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया को यह अधिकार दिया कि अगर इन दोनों नेताओं को यकीन हो जाता है कि भूपेन कुमार बोरा गलत हैं और हां, भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा, तो मैं अपना इस्तीफा वापस ले लूंगा। बोरा ने कहा, आज सुबह, प्रद्युत बोरदोलोई ने मुझे फोन किया। मैं पूरा दिन इंतजार करूंगा और अगर प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया मुझे यकीन दिला पाते हैं कि हां, यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) है, तो मैं अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए तैयार हूं।
उन्होंने कहा, यह एपीसीसी नहीं है, यह अब एपीसीसी (आर) है। इसलिए मैं एपीसीसी (आर) में काम करने के लिए तैयार नहीं हूं। अभी यह मेरी जानकारी और समझ के हिसाब से एपीसीसी (आर) नहीं है। यह एजीपीपी, एनसीपी, एनसीपी, टीएमसी जैसा एपीसीसी (आर) है। यह एपीसीसी (आर) के अंदर है। आप जाकर एनालाइज करें।
यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ दिन पहले ही असम में कांग्रेस के तीन सीनियर नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। असम कैबिनेट ने हाल ही में एक रैली के दौरान महिलाओं के प्रति को कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारे करने के मामले में कांग्रेस के सीनियर नेताओं देबब्रत सैकिया, भूपेन कुमार बोरा और मीरा बोरठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश पुलिस को दिया था।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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