विश्व-लोक

बांग्लादेश के नये विदेश मंत्री से सेना नाखुश

बांग्लादेश में पिछले डेढ़ साल की उथल-पुथल के बाद चुनाव हुए और नई सरकार बनी। हालांकि अब नया लफड़ा ये है कि अंतरिम सरकार में एनएसए रहे डॉक्टर खलीलुर्रहमान को बीएनपी ने टेक्नोक्रेट कोटे से विदेश मंत्री बना दिया है, लेकिन सेना इससे खुश नहीं है।
दरअसल इस विवाद की जड़ें गहरी हैं। डॉक्टर खलीलउर्रहमान और सेना प्रमुख वकार-उज-जमां के बीच तनातनी की शुरुआत अंतरिम सरकार के दौरान ही हो गई थी। एनएसए रहे खलीलुर्रहमान की खूब चलती थी क्योंकि उन्हें अमेरिका करीबी माना जाता है। नॉर्थ ईस्ट न्यूज के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई और काम को लेकर लंबा वक्त अमेरिका में गुजारा है, ऐसे में उन्हें इस मामले में विशेषज्ञ माना जाता है। नई सरकार में बीएनपी के साथ विवादों के बाद भी वो विदेश मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद पाने में कामयाब हो गए।
अंतरिम सरकार के दौरान डॉक्टर खलीलुर्रहमान और आर्मी चीफ वकार जमा में कई मुद्दों पर असहमति थी। इसमें मुख्य मुद्दा म्यांमार के लिए मानवीय कॉरिडोर था, जिसे लेकर मई, 2025 में दोनों आपस में भिड़ गए। खलीलुर्रहमान इसका समर्थन कर रहे थे तो आर्मी चीफ ने खुलकर विरोध किया था। वकार जमां इसे खूनी कॉरिडोर कहकर गलियारे का विरोध कर रहे थे। वहीं खलीलुर्रहमान इसे बनाना चाहते थे, जिसके बाद ये नैरेटिव तेज हो गया कि वो अमेरिका के पक्ष में हैं। ये कॉरिडोर आज भी अटका है, जबकि खलीलुर्रहमान फिर सत्ता में हैं। दोनों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर होने के बावजूद डॉक्टर खलीलुर्रहमान के ढाका कैंटोनमेंट में घुसने पर बैन लग गया था। डॉक्टर खलीलुर्रहमान ने आर्मी चीफ वकार जमां की इस हरकत के जवाब में बड़ा दांव खेलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को सीजीएस बनाने की सारी कोशिशें कर डालीं। वो इस तरह से वकार जमां के ऊपर अपने आदमी को बिठाना चाहते थे, ताकि उनकी ताकत कमजोर हो जाए। हालांकि वकार जमां ने वक्त रहते इसे पहचाना और खलीलुर्रहमान के चहेते अफसरों का रास्ता ही रोक दिया।

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