बीएलए ने मुनीर के पास भेजे सैनिकों के 200 ताबूत

बलूचिस्तान में मौजूदा हालात पाकिस्तान की सैन्य लीडरशिप के दावों के ठीक उलट नजर आ रहे हैं। भले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा कर रहे हों कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हालिया, संघर्षों में बलूच विद्रोहियों द्वारा 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को ताबूत में वापस भेजने की खबरों ने मुनीर के इन दावों की पोल खोल दी है। पाकिस्तान की सैन्य विफलता के इन सबूतों के सामने आने के बाद अब यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या जनरल मुनीर ने सरेंडर कर दिया है। मशहूर एक्टिविस्ट डॉ. महरंग बलूच ने पाकिस्तानी हुकूमत को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बलूचिस्तान ने अपना इरादा और रास्ता चुन लिया है। उन्होंने याद दिलाया कि बलूच वह कौम है जिसने 1971 के दौर में भी ऐसे आंदोलन खड़े किए थे, जिनकी मिसाल पूरे पाकिस्तान में कहीं और नहीं मिलती।
दिल्ली से लगभग 1000 किलोमीटर दूर, बलूचिस्तान अपनी आजादी के लिए एक निर्णायक जंग लड़ रहा है। करीब 26 साल पहले गठित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का मुख्य उद्देश्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है, जिसका अपना अलग झंडा और विशिष्ट पहचान हो। हालांकि, दशकों से पाकिस्तानी सेना ने इस विद्रोह को बेरहमी से कुचलने की नीति अपनाई है। इस दौरान अनगिनत बलूच युवाओं के गायब होने और सेना के गुप्त टॉर्चर रूम्स की खौफनाक कहानियों ने बलूच नागरिकों के दिलों में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ नफरत की आग को और तेज कर दिया है।



