जापान ने कानून में किया महत्वपूर्ण बदलाव

जापान एक ऐसा देश है, जहां पति-पत्नी को एक समान सरनेम रखना जरूरी होता है। जापान का यह एक सरनेम वाला कानून 125 साल पुरानी परंपरा बताई जाती है, जिसे 1898 के सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। इस नियम के अनुसार, शादी करने वाले जोड़ों को कानूनी रूप से एक ही पारिवारिक नाम यानी सरनेम अपनाना अनिवार्य होता है। हालांकि, अब इस कानून में ढील दी गई। इस कानून के खिलाफ हाल के वर्षों में जापान में बड़े पैमाने पर विरोध और कानूनी लड़ाइयां शुरू हुई हैं। कामकाजी महिलाओं का तर्क है कि शादी के बाद नाम बदलने से उनके करियर की पहचान, प्रोफेशनल डिग्री और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में भारी उलझन पैदा होती है। बढ़ते विरोध को देखते हुए जापान सरकार ने इस कानून में बदलाव करने का आश्वासन दिया। अब जापानी सरकार चयनात्मक उपनाम प्रणाली पर विचार कर रही है, ताकि जोड़े अपनी मर्जी से यह तय कर सकें कि उन्हें एक ही नाम रखना है या अपनी पुरानी पहचान बरकरार रखनी है।
पूरी दुनिया में जापान इकलौता ऐसा विकसित देश बचा है,
जहां यह नियम इतना सख्त है।जापान की जनता और वहां की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना
है कि यह कानून मानवाधिकारों के खिलाफ है। जापान की सुप्रीम कोर्ट में कई बार इस पर बहस हुई है। हालांकि, कोर्ट ने अभी इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया है, लेकिन सरकार को इस पर नया कानून बनाने का सुझाव जरूर दिया था।



