प्रदोष व्रत का महत्त्व

हमारे हिन्दू धर्म में कई ऐसे व्रत हैं जिनको करने से मन को शान्ति व आशीर्वाद मिलता है। यह व्रत अति मंगलकारी और कृपा प्रदान करने वाले होते हैं। वैसे तो हर व्रत का अपना-अपना महत्व है पर प्रदोष व्रत कलियुग में अति मंगलकारी है और यह व्रत माह की त्रयोदशी तिथि में साथ काल में होता है। मान्यता है कि प्रदोष के समय में शिव जी कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का बखान करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के दोष मुक्त होते हैं। यह व्रत माता पार्वती और शिव को समर्पित है जो शाम के समय की गई पूजा से धन, सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करते हैं।
प्रदोष व्रत की एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी थी। वह भिक्षा मांगकर अपना पेट पालती थी। एक दिन उसे भिक्षा मांगते-मांगते रास्ते में एक राजकुमार मिला जो विदर्भ देश का था। उसके पिता (राजा) को शत्रुओं ने मार दिया था और राज्य छीन लिया था। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गयी और वह उसको अपने घर ले आईं और उसे वह अपने पुत्र की तरह पालने लगीं। एक दिन उसकी मुलाकात शांडिल्य ऋषि से हुई। ़ऋषि ने उसको प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी थी। उस ब्राह्मणी ने प्रदोष का व्रत रखना शुरू किया। राजकुमार ने एक दिन गंधर्व कन्या अंशुमती से विवाह कर लिया। उस गंधर्व राज की सेना की सहायता से राजकुमार ने फिर से विदर्भ पर विजय प्राप्त की और सुखी जीवन व्यतीत करने लगे। इस प्रकार भगवान शिव ने प्रसन्न होकर ब्राह्मणी और राजकुमार को सुख-समृद्धि प्रदान की। ऐसे ही वे अपने सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।
पूजा करने की विधि कुछ इस प्रकार है कि सूर्यास्त से लगभग 45-60 मिनट पहले पूजा की जाती है। शिव और पार्वती की तस्वीर और शिवलिंग सामने रखें। उसमें चावल, धूप, दीप, गंध, बेलपत्र चढ़ाये। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय का जप करें। आप इस व्रत को निर्जला या फलाहार भी रख सकते हैं। कई जगहों पर अपनी श्रद्धा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों यह प्रदेाष व्रत रख सकते हैं। इस व्रत को करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। पचांग के मुताबिक, प्रदेष व्रत हर महीने के कृषण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। फरवरी में फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी को रात 8 बजकर 43 मिनट पर होगी और यह 1 मार्च को शाम 7 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 1 मार्च को प्रदोष का व्रत रखा जायेगा। साथ ही इस दिन रविवार है जिसके कारण यह रती प्रदोष कहलायेगा।
3 मार्च को उपछाया चंद्र ग्रहण
जब चन्द्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है तब चंद्र ग्रहण होता है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में होते हैं। सूर्य ग्रहणों के विपरीत, चंद्र ग्रहण को देखना सुरक्षित होता है। यह कई घंटो तक चलता है और पृथ्वी के रात्रि भाग से दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण के मुख्य 3 प्रकार होते हैं। पूर्ण ग्रहण, आंशिक ग्रहण और उपछाया ग्रहण। पूर्ण ग्रहण के दौरान अकसर चांद पूरी तरह पृथ्वी पर छाया में होता है। आंशिक ग्रहण में चंद्रमा आधी छाया देता है और उपक्षय ग्रहण में केवल पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया में होता है। इस साल 2026 में पहली बार चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पड़ रहा है और इस दिन इत्फाक से होलिका दहन भी है। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर पड़ेगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
उपछाया चंद्र ग्रहण की शुरुआत 2 बजे ही शुरू हो जायेगी। भारत समेत यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया, दक्षिण, पूर्व एशिया, आस्ट्रेलिया, अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी। भारत में ज्यादातर यह आंशिक चंद्र ग्रहण आयेगा और पश्चिमी क्षेत्रों में प्रच्छाया ग्रहण देखने को मिलेगा।
15 मार्च को शुक्रादित्य राजयोग
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों की चाल का असर सभी राशियों पर पड़ता है और कुछ खास दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। मार्च मध्य में सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे और पहले से वहां विराजमान शुक्र के साथ शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण होगा। यह योग करियर, धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत देता है और कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ साबित हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में शुक्र और सूर्य की युति को शुभ माना जाता है। 15 मार्च 2026 को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे और पहले से मौजूद शुक्र के साथ यह विशेष राजयोग बनेगा।
मिथुन राशि-करियर और व्यवसाय में लाभ: इस राशि के वालों के लिए यह समय कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल देने वाला है। अधिकारियों का सहयोग मिलने के योग हैं और नई योजनाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। पार्टनरशिप में काम कर रहे लोगों को लाभ होने की संभावना है। आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी और बचत बढ़ सकती है।
तुला राशि- पार्टनरशिप और निजी जीवन में सफलता: तुला राशि वालों पर यह योग विशेष प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं। पार्टनरशिप वाले कामों में फायदा मिलने के योग हैं। शादी का इंतजार कर रहे लोगों को अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं।नौकरी बदलने या नई नौकरी की योजना बनाने वालों के लिए समय शुभ है। आर्थिक योजनाएं सफल होंगी और घर-परिवार में सुख-सुविधाओं में वृद्धि
होगी।
मीन राशि- आय और निवेश में बढ़ोतरी:इन जातकों के लिए यह राजयोग आय बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या सैलरी बढ़ने की खुशखबरी मिल सकती है। व्यापार में नई डील फाइनल हो सकती है, जिससे फायदा होगा।
चल रहा है व्यतिपात योग: कुछ योग ऐसे होते हैं, जिनका प्रभाव बहुत तीव्र होता है। व्यतिपात योग भी उन्हीं में से एक है। इस समय ग्रहों की ऊर्जा असामान्य रूप से प्रभावी हो जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस समय कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सिंह राशि-आपके लिए यह समय मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां अचानक बढ़ सकती हैं और वरिष्ठ लोगों से मतभेद की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में जोखिम न लें, निवेश टालना बेहतर रहेगा। परिवार में अहंकार के कारण तनाव बढ़ सकता है। जीवनसाथी के साथ गलतफहमी हो सकती है। सिरदर्द या थकान परेशान कर सकती है। वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
वृश्चिक राशि-इस राशि वालों के लिए यह योग भावनात्मक उतार चढ़ाव ला सकता है। करीबी लोगों से विवाद की आशंका है। कार्य स्थल पर छिपे विरोधी सक्रिय हो सकते हैं, जिससे योजनाओं में बाधा
आएगी।
कुंभ राशि-कुंभ राशि के लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता और चिंता का सामना करना पड़ सकता है। काम में एकाग्रता कम हो सकती है। आर्थिक मामलों में अचानक खर्च बढ़ सकता है, इसलिए उधार देने से बचें। घर में किसी सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रह सकती है।
(चक्षु स्वामी-हिफी फीचर)



