विश्व-लोक

ईरान ने कहा एक भी बूंद तेल नहीं जाने दूंगा

हार्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से खुली जंग छिड़ गई है और एक बार फिर दुनिया तेल संकट की ओर मुंह बाये खड़ी है। एक तरफ अमेरिका ने दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार के समुद्री रास्ते होर्मुज में अपनी नाकेबंदी लगा दी है तो दूसरी तरफ ईरान ने भी यहां से एक भी बूंद तेल और गैस नहीं जाने की कसम खा ली है। ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) का कहना है कि जब तक इस इलाके में अमेरिका की बुरी हरकतें जारी रहेंगी, तब तक यहां से तेल और गैस की एक बूंद भी एक्सपोर्ट नहीं की जाएगी। यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिकी सेना ने 15 जुलाई तड़के ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकेबंदी लागू कर दी। यह कार्रवाई होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में की गई। इससे कुवैत और बहरान जैसे उन देशों पर नए हमले शुरू हो गए हैं जहां अमेरिकी सेना तैनात है और युद्ध खत्म करने के लिए हुआ अंतरिम समझौता और कमजोर पड़ गया है।
आईआरजीसी का यह भी कहना है कि अमेरिका की आक्रामक कार्रवाइयों का नतीजा सिर्फ यही होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी होगी। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस ट्रांजिट चोकपॉइंट है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 फीसद हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका के साथ हुए समझौते से पूरी तरह पीछे हटने का ऐलान किया है। ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन में बैठी ट्रंप सरकार ने पिछले महीने हुई उस संधि का बार-बार उल्लंघन किया है, जिसका मकसद लड़ाई को रोकना था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान अब खुद को इस सीजफायर समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं मानता, क्योंकि अमेरिका ने न केवल समझौते का उल्लंघन किया, बल्कि उसे पूरी तरह खत्म भी कर दिया है- खासकर ईरानी बंदरगाहों पर नई नौसैनिक नाकेबंदी लगाकर।

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