ममता बनर्जी का ट्रम्प कार्ड

बिहार में ठीक चुनाव के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को धनराशि देने की घोषणा ही नहीं की थी बल्कि आनन-फानन में महिलओं के बैंक खाते में पैसा पहुंचा दिया गया। चुनाव में इसका फायदा भी नीतीश कुमार की पार्टी को मिला ओर 2020 के इलेक्शन में सिर्फ 42 सीटें पाने वाली जद (यू) ने इस बार 85 सीटों पर विजय हासिल की। चुनाव का यह ट्रम्प कार्ड माना गया था। अब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वही ट्रम्प कार्ड अपनाया है। चुनाव से पहले ही लक्ष्मी भंडार योजना की राशि पांच सौ रुपये बढ़ा दी गयी है। अब पात्र महिलाओं को 1500 हर महीने मिला करेंगे। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन भी बढ़ा दिया गया है। लक्ष्मी भंडार की राशि इसी फरवरी महीने से बढ़ा दी गयी है। यह योजना फरवरी 2021 में ममता बनर्जी सरकार ने ही शुरू की थी। इसका लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने 20 लाख राज्य कर्मचारियों को 25 फीसद महंगाई भत्ता देने का आदेश दिया है। यह भत्ता 2008 से 2019 तक बकाया था। ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मूल वेतन के अनुसार तय किया था जिससे केन्द्र सरकार ने कर्मचारियों की अपेक्षा राज्य कर्मियों का घाटा हो गया था। अब ममता सरकार को इसी माच्र तक उसका भुगतान करना होगा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की अगुआई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 फरवरी को लक्ष्मी भंडार योजना में 500 रुपये की मासिक वृद्धि की घोषणा की। इसके साथ ही गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए एक नए पोर्टल का प्रस्ताव रखा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, “हम सौ दिन रोजगार योजना, आवास योजना जैसी कई योजनाओं में नंबर एक पर हैं लेकिन केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के लिए धन देना बंद कर दिया। हम यह बजट जनता के लिए पेश कर रहे हैं, चुनाव के लिए नहीं। हमने अपना वादा निभाया है। इसलिए, हमने इस फरवरी से लक्ष्मी भंडार में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की है। गिग वर्कर्स के लिए, हम एक पोर्टल बनाएंगे जहां वे लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे।”
एक्स पर एक पोस्ट में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने लिखा, बड़ी घोषणा! वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने बजट वक्तव्य में, हमारी वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत वित्तीय सहायता में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की है। ममता के नेतृत्व में, हम महिलाओं को गरिमापूर्ण और स्वतंत्र जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने वित्त वर्ष 2026-27 के अंतरिम राज्य बजट की प्रमुख विशेषताओं के बारे में बताया। इसमें सभी क्षेत्रों में कल्याणकारी उपायों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
लक्ष्मी भंडार योजना के तहत, महिला लाभार्थियों को अब फरवरी 2026 से प्रति माह अतिरिक्त 500 रुपये प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री बनर्जी ने अस्थायी और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के लिए भी अतिरिक्त लाभों की घोषणा की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायकों, आशा कार्यकर्ताओं, आईसीडीएस कार्यकर्ताओं, साथ ही नागरिक स्वयंसेवकों, ग्राम पुलिस और हरित पुलिस कर्मियों के मासिक वेतन में अप्रैल 2026 से 1,000 रुपये की वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायकों को 60 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु होने की स्थिति में 5 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा मिलेगा।यह योजना फरवरी 2021 में ममता बनर्जी सरकार द्वारा लॉन्च की गई। इसका उद्देश्य राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारना और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना है। पश्चिम बंगाल की स्थायी निवासी महिलाएं, जिनकी उम्र 25 से 60 साल के बीच है और वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। वह इस योजना का लाभ ले सकती हैं। लगभग 2.42 करोड़ महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है। योजना की शुरुआत में सामान्य अथवा अन्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1000 और एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं को 1200 रुपये मिलते थे। अब सामान्य वर्ग को 1500 और एससी-एसटी महिलाओं को 1700 रुपये मिलेंगे।
विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने वाली योजनाएं जीत की गारंटी देती हैं। पिछले दो साल में 6 चुनाव इसका प्रमाण देते हैं। मध्य प्रदेश में साल 2023 चुनाव से पहले लाडली बहन योजना शुरू की गई और 2018 में हारने वाली बीजेपी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई। इसके बाद महाराष्ट्र में लाडकी बहीण योजना, छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना, बिहार में महिला रोजगार योजना और ओडिशा में सुभद्रा योजना ने बीजेपी को जीत दिलाई। इन सभी योजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के बैंक खाते में सीधे पैसे भेजे जाते हैं। वहीं, 2024 में झारखंड में जेएमएम ने हर महीने पैसे देने वाली योजना शुरू कर बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। अब वही ट्रम्प कार्ड ममता बनर्जी ने भी चला है।
पश्चिम बंगाल सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चल रहे महंगाई भत्ते के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 20 लाख राज्य कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि 2008 से 2019 तक की अवधि का डीए बकाया भुगतान किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि पहले के अंतरिम आदेश के अनुसार, बकाया राशि का कम से कम 25 फीसद 6 मार्च तक जारी किया जाना चाहिए। बेंच ने राज्य सरकार को बाकी 75 प्रतिशत डीए पर फैसला करने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाने का भी आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कर्मचारियों को महंगाई भत्ता एक कानूनी अधिकार के तौर पर जारी करने का निर्देश दिया है, क्योंकि यह वेतन की गणना के लिए आरओपीए नियमों में शामिल है। 2009-19 तक का डीए का बकाया कर्मचारियों को जारी किया जाए। इसमें शामिल वित्तीय प्रभावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा और दो रिटायर्ड हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के साथ सीएजी या सीएजी द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति बंगाल राज्य के कर्मचारियों को डीए के भुगतान का निर्धारण करेगी।
इसी बेंच ने पिछले साल अगस्त में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल 16 मई को पारित एक अंतरिम आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को तीन महीने के भीतर महंगाई भत्ते का 25 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया था। बाद में ममता बनर्जी सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से डेडलाइन को छह महीने बढ़ाने की अपील की। 1 अप्रैल, 2025 से बंगाल सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता पिछले साल के राज्य बजट प्रस्तावों में मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच यह अंतर लगभग 40 प्रतिशत है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



