विदेश

भारत-चीन संबंधों में नई गर्माहट

भारत और चीन के बीच संबंधों में हालिया सुधार को दोनों देशों के लिए आर्थिक विकास और व्यापारिक सहयोग के नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपसी रिश्तों में आई सकारात्मकता से द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी और एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ मिलकर वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने नई दिल्ली में आयोजित चीनी नववर्ष समारोह के दौरान बताया कि पिछले वर्ष भारत-चीन व्यापार अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया। दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल आँकड़ा लगभग एक सौ पचपन अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में बारह प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत से चीन को होने वाले निर्यात में लगभग दस प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में निहित विशाल संभावनाओं को उजागर करती है।राजदूत शू के अनुसार, अगस्त में तिआनजिन में भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और सकारात्मक स्तर देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि चीन, अंतरराष्ट्रीय समूह ब्रिक्स में भारत की भूमिका का समर्थन करता है और बहुपक्षीय मंचों पर भारत के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, चीन वैश्विक दक्षिण के विकास के व्यापक एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। भारत की व्यापारिक संस्थाओं ने भी इस सकारात्मक माहौल का स्वागत किया है। भारतीय वाणिज्य मंडल के महानिदेशक राजीव सिंह ने कहा कि भारत और चीन स्वाभाविक साझेदार हैं और मिलकर वे विश्व की कुल आर्थिक वृद्धि का लगभग पचास प्रतिशत योगदान दे सकते हैं। उनका मानना है कि व्यापारिक आँकड़े नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं, बशर्ते सहयोग का दायरा और व्यापक किया जाए। भारत-चीन व्यापार केंद्र के उपाध्यक्ष विजय कुमार मिश्रा ने कहा कि चीन की आर्थिक स्थिरता, उच्च गुणवत्ता वाले विकास और खुले वैश्विक व्यापार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भारतीय निवेशकों और उद्योग जगत के लिए भरोसे का संकेत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय निर्यात में निरंतर वृद्धि यह दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग और मूल्य शृंखला के एकीकरण की अपार संभावनाएँ अभी शेष हैं। राजनीतिक विश्लेषक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी ने भी भारत-चीन संबंधों को लेकर आशावाद व्यक्त किया। उनके अनुसार वर्ष 2026 दोनों देशों के लिए सकारात्मक कदमों का वर्ष साबित हो सकता है। उन्होंने यात्रा प्रतिबंधों में ढील और सीधी विमान सेवाओं की बहाली को रिश्तों में सुधार का ठोस संकेत बताया। व्यापार और युवा नेतृत्व से जुड़े संगठनों ने भी संवाद, आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वास निर्माण और स्थिरता पर लगातार काम किया गया, तो भारत और चीन न केवल अपने लिए बल्कि पूरे एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विकास का नया मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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