बांग्लादेश में चुनाव व जनमत संग्रह संपन्न, हिंसा व धमकी की खबरें

बांग्लादेश में हिंसा व धमकियों के बीच आज (12 फरवरी 2026) उसके राजनीतिक इतिहास के सबसे निर्णायक चुनावों में से एक की शुरुआत हो गई है। यह 13वां राष्ट्रीय संसदीय चुनाव है। जो ऐसे समय हो रहे हैं जब अगस्त 2024 में छात्रों के आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार को सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि देश की संवैधानिक संरचना में बड़े बदलावों पर भी मुहर लगने वाली है। संसदीय मतदान के साथ-साथ 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है।
मतदान स्थानीय समयानुसार सुबह 7.30 बजे से शुरू होकर शाम 4.30 बजे तक चलेगा। देश की 299 संसदीय सीटों पर वोट डाले जाएंगे। एक सीट (शेरपुर-3) पर जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया है। कुल 50 राजनीतिक दल चुनाव मैदान में हैं। 1,755 उम्मीदवार राजनीतिक दलों की ओर से और 273 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। करीब 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस बार चुनाव सिर्फ संसद के गठन तक सीमित नहीं है। इसके साथ एक जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है, जिसमें 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनता की राय ली जा रही है। प्रस्तावित सुधारों में प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल की सीमा, निष्पक्ष केयरटेकर सरकार प्रणाली की बहाली और संसद में एक ऊपरी सदन के गठन जैसे बड़े बदलाव शामिल हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक संतुलन मजबूत होगा, जबकि आलोचक मानते हैं कि लागू करने के तरीके पर सब कुछ निर्भर करेगा। सफेद बैलेट अपने संसदीय प्रतिनिधि के चुनाव के लिए होगा। गुलाबी बैलेट ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर जनमत संग्रह के लिए।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दशकों से राजनीति के केंद्र में रही आवामी लीग इस बार मैदान में नहीं है। उसका पंजीकरण निलंबित होने के कारण मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है।



