कारोबार

नोएल टाटा के बेटे को ट्रस्ट में नहीं मिली जगह

टाटा ग्रुप में आंतरिक सत्ता संतुलन को लेकर विवाद बना हुआ है। नोएल टाटा अपने बेटे नेविल को उन दो शक्तिशाली ट्रस्टों में से एक ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल कराने में सफल रहे, जो टाटा संस में बहुलांश हिस्सेदारी रखते हैं, लेकिन दूसरे ट्रस्ट में उनकी योजना सफल नहीं हो पाई। सूत्रों ने ये जानकारी दी है। टाटा ट्रस्ट्स परमार्थ संगठनों का एक समूह है, जिसके पास टाटा संस में कुल 65.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस 156 साल पुराने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, जिसमें लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं और इनमें से 30 कंपनियां शेयर बाजारों में लिस्ट हैं।
ट्रस्ट द्वारा जारी बयान में कहा गया कि नोएल के बेटे नेविल और टाटा ग्रुप के पूर्व कंपनी प्रमुख भास्कर भट्ट को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में नियुक्त किया गया। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि वे इन दोनों को सर रतन टाटा ट्रस्ट में नियुक्त नहीं करा पाए। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों के अनुसार, ये असफलता सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी और उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन की आपत्ति के कारण हुई। श्रीनिवासन ने कहा कि नियुक्तियों का प्रस्ताव उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना लाया गया और इस पर सही तरीके से चर्चा होनी जरूरी थी। ट्रस्ट की बैठक में ये विवाद कुछ हफ्ते पहले लंबे समय से ट्रस्टी रहे मेहली मिस्त्री को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से हटाए जाने के बाद सामने आया। मेहली मिस्त्री शापूरजी पलोनजी परिवार से जुड़े हैं। शापूरजी पलोनजी परिवार के पास टाटा संस में 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 11 नवम्बर को टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के बेटे नेविल को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। ये कदम टाटा के दो अलग-अलग गुटों, एक गुट नोएल के नेतृत्व वाले और दूसरा गुट दिवंगत रतन टाटा के विश्वासपात्र मेहली मिस्त्री को प्रमुख ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया और उन्होंने बिना कोई कानूनी चुनौती दिए मामले को यूं ही छोड़ दिया, जैसी उम्मीद की जा रही थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button