मानवाधिकारों को रौंदता पाकिस्तान

पाकिस्तान में आतंकवाद की नर्सरी तैयार की जाती है, यह बात पूरी दुनिया जानती है। अमेरिका भी जानता है, भले ही ह्वाइट हाउस में पाक के सेना प्रमुख फील्ड माार्शल मुनीर को लंच कराया जाता है। चीन भी जानता है, जिसके इंजीनियरों और कर्मचारियों की हत्या पाक मंे कर दी गयी। अब पाकिस्तान मानवाधिकारों को रौंदने लगा है। इसका ताजा उदाहरण अभी खैबर पख्तूनख्वा मंे दिखा है। यह किसी और देश का हिस्सा नहीं है बल्कि पाकिस्तान की ही धरती है। यहां के लोग पाकिस्तान की सेना का अत्याचार और दमन बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए आवाज उठाने लगे। पाकिस्तान की निरंकुश सेना और तानाशाही सरकार को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। पाकिस्तान की वायुसेवा ने हवाई हमला करके निर्दोष नागरिकों को मार डाला। इनमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सभी शामिल हैं। माना जा रहा है कि सेना प्रमुख असीम मुनीर की सरपरस्ती मंे आतंकवाद के प्रसार के लिए जमकर फंडिंग की जा रही है। असीम मुनीर के मौन समर्थन से आतंकी भर्ती की रैलियां पाकिस्तान में हो रही हैं। भारत से गये मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक तो पहले से समझा जा रहा था, अब पाकिस्तान की सेना अपने नागरिकों पर जेएफ-17 लड़ाकू विमानों से बम गिराकर खुलेआम नरसंहार कर रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ पाकिस्तान के कथित मित्र देशों को भी इसकी भत्र्सना करनी चाहिए।
आतंकवाद की फसल बोने और काटने वाले पाकिस्तान ने अब अपनी धरती खैबर पख्तूनख्वा में नरसंहार किया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा में हवाई हमला करके अपने ही नागरिकों को मार दिया है। खैबर पख्तूनख्वा का मत्रे दारा गांव इस हवाई हमले के बाद महिलाओं और बच्चों के शवों से पट गया था।
मिली जानकारी के मुताबिक 21 और 22 सितम्बर की दरम्यानी रात करीब 2 बजे पाकिस्तानी वायुसेना ने तिराह घाटी स्थित गांव पर कम से कम 8 एलएस-6 बम गिराने के लिए जेएफ-17 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी वायुसेना ने यहां 5 घरों को निशाना बनाया था। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा में अतीत में कई आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए हैं और इस क्षेत्र से कई नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं। खैबर पख्तूनख्वा की पुलिस के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच प्रांत में 605 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिनमें कम से कम 138 नागरिक और 79 पाकिस्तानी पुलिसकर्मी मारे गए। अकेले अगस्त में 129 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें छह पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक संघीय कांस्टेबुलरी कर्मियों की हत्या भी शामिल है।
पाकिस्तान आतंकवाद को प्रश्रय देता है। यही कारण है कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ प्रमुख आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें नष्ट कर दिया। अब खबर है कि जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) जैसे आतंकवादी संगठन अफगान सीमा के पास खैबर पख्तूनख्वा के अंदर नए ठिकाने बना रहे हैं। यह पहाड़ी इलाका है, यह अफगानिस्तान की सीमा से जुड़ा हुआ है और इस वजह से इसे आतंकी छिपने के लिए अच्छी जगह के रूप में देख रहे हैं। कई क्षेत्रों में अभी भी 1980 के दशक के सोवियत विरोधी अफगान युद्ध के दौरान और मुंबई मंे के हमलों के बाद अफगानिस्तान पर अमेरिकी आक्रमण के दौरान बनाए गए ठिकाने मौजूद हैं।
आतंकवाद एक बार फिर सिर उठा रहा है। असीम मुनीर की सरपरस्ती में पाकिस्तान आतंकवादियों को जमकर फिर फंडिंग करने लगा है। उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। एबटाबाद के गढ़ी दलोला से एक वीडियो फुटेज मिला है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की एक विशाल रैली खुलेआम आयोजित की गई थी, जिसे पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र का स्पष्ट समर्थन प्राप्त था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का सार्वजनिक रूप से फिर से शुरू होना पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ एक मौन समझौते की ओर इशारा करता है, जिससे आतंकवादी समूहों पर अंकुश लगाने की इस्लामाबाद की प्रतिबद्धता पर चिंताजनक सवाल उठते हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन, खासकर जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल्लाह मुजाहिद्दीन, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रणनीति के तहत अपने कैंप ट्रांसफर कर रहे हैं। आतंकवादियों को पाकिस्तान सुरक्षित पनाह के रूप में मानसेहरा भेज रहा है। मानसेहरा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हजारा डिवीजन में स्थित है। खैबर पख्तूनख्वा के ही लोअर डीआईआर में हिज्बुल एक नया ट्रेंनिंग कैंप बना रहा है।
जानकारी मिली है कि पाकिस्तानी आतंकी समूह, खासकर जैश-ए-मोहम्मद, अब खैबर पख्तूनवा के पेशावर में एक विशाल रैली करने जा रहा है। ये रैली 25 सितंबर को अल मरीबेथुन के नेतृत्व में होगी। ये जैश-ए-मोहम्मद का नया नाम है, एक नया गढ़ा हुआ नाम। जैश-ए-मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने बहुत लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखा है और इसीलिए आगे किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचने के लिए यह नाम बदला गया है।
यह भी ध्यान देने की बात है। पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और उसके सुसाइड विंग मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध करने के पाकिस्तान और चीन के संयुक्त प्रयास पर तकनीकी रोक लगा दी है।
अमेरिका के इस फैसले को एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में वाशिंगटन ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को अपनी राष्ट्रीय सूची में विदेशी आतंकवादी संगठनों के रूप में नामित किया था। उस समय, इस कदम को एक संतुलन वाले कदम के रूप में देखा गया था, क्योंकि अमेरिका ने पहलगाम हमले को अंजाम देने के आरोपी द रेजिस्टेंस फ्रंट को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा समूह करार दिया था। वाशिंगटन की ओर से पहले घोषित किए जाने से उत्साहित होकर, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में बीएलए और मजीद ब्रिगेड को सूचीबद्ध करने के लिए चीन के साथ मिलकर तुरंत प्रयास किया। इस कदम से पाकिस्तान के बार-बार लगाए जा रहे उन आरोपों को और बल मिलता कि बीएलए को भारत का समर्थन प्राप्त है लेकिन, अमेरिका का यह ताजा रुख इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों के लिए एक झटका साबित हुआ है।
ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ ऐसा रियासतें थीं जहां ब्रिटिश सम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। आजादी के समय इन रियासतों को 3 ऑप्शन दिए गए थे। भारत के साथ विलय, पाकिस्तान के साथ विलय या फिर स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहचान। इन्हीं रियासतों में से बलूचिस्तान भी था जिसमें कलात, खारान, लॉस बुरा और मकरान की रियासतें शामिल थीं। बलूचिस्तान ने इस दौरान स्वतंत्र रहने की इच्छा जताई। इसके बाद साल 1947 में मुस्लिम लीग और कलात के बीच एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया जिसमें माना गया था कि कलात की अपनी एक अलग पहचान होगी। मुस्लिम लीग ने कलात की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कही थी। तब बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान भी हो गया। हालांकि, साल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने अभियान चलाकर कलात समेत पूरे बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



