अमरीकी हमले में मारी गयी स्कूली छात्राओं की तस्वीर के साथ शांति वार्ता

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता में शामिल होने के लिए ईरान ने जिस अनोखे तरीके का इस्तेमाल किया, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को अमेरिका के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए ईरान इजरायल और अमेरिका के हमले में मारे गए 168 बच्चों की तस्वीरों, उनके स्कूल बैग और जूतों को विमान की सीटों पर रखकर पहुंचा तो दुनिया में हड़कंप मच गया। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने से पहले एक भावुक और प्रतीकात्मक संदेश दिया है। जिस विमान में ईरान का प्रतिनिधि मंडल इस्लामाबाद भेजा जाना था, उसकी सीटों पर ईरान ने इजरायल और अमेरिका को बच्चों के हत्यारे के रूप में पेश करने के लिए उसके हमले में तेहरान के मिनाब में मारे गए 168 स्कूली बच्चों की तस्वीरों, उनके स्कूल बैग और जूतों को विमान की सीट पर सजा दिया। ईरान ने इसे विरोध स्वरूप पेश किया, ताकि शांति वार्ता से पहले पूरी दुनिया की नजर इजरायल और अमेरिका की इस करतूत पर भी पड़ सके। शनिवार को अमेरिका-ईरान शांति वार्ता शुरू होने से ठीक पहले ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ ने अपने विमान के अंदर की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की तो तहलका मच गया। तस्वीर में खाली सीटों पर मिनाब हमले में शहीद हुए 168 स्कूली बच्चों की तस्वीरें, खून से सने स्कूल बैग, जूते और सफेद फूल रखे दिख रहे हैं। मिनाब में मारे गए 168 स्कूली बच्चों की तस्वीरों, उनके खून से सने बैग और जूतों को विमान की सीट पर सजाने के बाद गालिबाफ ने एक्स पर कैप्शन में लिखा, “मेरे इस उड़ान के साथी”। यह भावुक पोस्ट 28 फरवरी को ईरान के मिनाब में शजारेह तैयेबा प्राथमिक स्कूल पर किए गए इजरायल और अमेरिका के हमलों की याद दिलाती है, जिसमें इन सभी स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। ईरान इस हमले के लिए तेहरान अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराता है, जिसमें मुख्य रूप से स्कूली बच्चे और स्टाफ समेत कम से कम 165-168 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को ही “मिनाब 168” नाम दिया गया है। गालिबाफ के इस प्रतीकात्मक कदम का मकसद वार्ता में ईरान की मजबूत स्थिति दिखाना और शहीद बच्चों की याद को जीवित रखना है। वे स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि शांति वार्ता के दौरान मिनाब के मासूम शहीदों को भुलाया नहीं जा सकता। इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के 40 दिन बीत जाने के बाद इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली उच्च-स्तरीय शांति वार्ता हो रही है।



