
सामान्य रूप से उपचुनावों का कोई महत्व नहीं होता है। इसमें हार अथवा जीत से सत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव से भी वहां की प्रथम भाजपा सरकार पर कोई असर नहीं पडे़गा। इसके बावजूद यह उपचुनाव विशेष रूप से चर्चा में रहेगा। सबसे पहली बात तो यही कि बिहार मंे पहली बार बनी भाजपा सरकार का यह पहला चुनाव था। इसलिए उपचुनाव होते हुए भी इसका महत्व था।
दूसरी बात यह कि भाजपा की यह पुश्तैनी विधानसभा सीट थी जिस पर जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने कब्जा करके एक तरह से भाजपा के किले को ढहा दिया है। तीसरी बात यह कि बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी। प्रशांत किशोर की पार्टी को बीते विधानसभा चुनाव मंे एक भी विधायक नहीं मिल पाया था। इस बार पीके स्वयं मैदान में उतरे और उन्हंे 64 हजार 151 मत मिले जबकि भाजपा के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को सिर्फ 44 हजार 827 वोट मिल पाये। तीसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रत्याशी रेखा गुप्ता रहीं जिनको 14 हजार 273 वोट मिले हैं। इस प्रकार पीके की जीत भाजपा के साथ मुख्य विपक्षी दल के लिए भी एक चेतावनी है।
बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव पर सबकी निगाहें थीं। बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष यहां से पहली बार 2006 का उपचुनाव जीते थे। तब यह सीट पटना वेस्ट कही जाती थी। नितिन नबीन यह सीट 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी जीते और हमेशा उन्हें 60 फीसदी वोट जरूर मिला, उससे पहले 1995 से 2005 तक इस सीट से नबीन किशोर प्रसाद सिंहा चुनाव जीतते रहे, जो मौजूदा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पिता थे। इसी सीट से बीजेपी के मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद भी 1977 में विधायक रह चुके हैं।
बांकीपुर में बीजेपी को छोड़कर अन्य दलों को बहुत ही कम सफलता मिली है। बांकीपुर वही सीट है जहां से विपक्ष के तौर पर कांग्रेस ही लड़ती रही है सिवाय 2025 और 2026 के उपचुनाव को छोड़कर, जब आरजेडी ये सीट लड़ी है।
2020 में इस सीट से शत्रुघ्न सिंहा के बेटे लव सिंहा चुनाव लड़े थे और हार गए थे।
बांकीपुर में बीजेपी को छोड़कर लड़ने वाली दूसरी पार्टियों को कमोबेश 30 फीसदी वोट मिलते रहे हैं। जब कांग्रेस ये सीट लड़ी तब भी उसे 31-32 फीसदी वोट मिलते रहे। 2010 में जब आरजेडी के विनोद श्रीवास्तव यहां से लड़े थे, तब उन्हें 16 फीसदी वोट मिले थे और इस बार आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को केवल 11 फीसदी वोट मिले, जबकि इन्हीं रेखा गुप्ता को 2025 के विधानसभा चुनाव में 30 फीसदी वोट मिले थे। यानी पिछले नवंबर से लेकर अगस्त तक आरजेडी के वोट में 19 फीसदी की कमी आयी।
इस पर आरजेडी की सांसद मीसा भारती ने कहा, “आरजेडी के लिए यह चिंता की बात है और आरजेडी नेतृत्व को इस हार पर विचार करना चाहिए। तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे से ये फिर से साबित हो गया कि जीत उसकी जरूर होती है , जो लगातार लड़ता है, जनता से जिसका निरंतर जुड़ाव होता है, जो कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का सम्मान करता है और उनके साथ संपर्क व संवाद कायम रखता है।
ये जीत भाजपा के विरोध और लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत है।
रोहिणी के इस पोस्ट को तेजस्वी यादव पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि तेजस्वी यादव ने इस उपचुनाव के अंतिम कुछ दिनों में प्रचार किया और एक तरह से अपने उम्मीदवार को अकेला छोड़ दिया था।
इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद उन्हें तेजस्वी यादव के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आरजेडी के नेता बातचीत में कहते हैं कि बांकीपुर एक शहरी सीट है और हम यहां से कभी नहीं जीते और इसलिए इस हार को हमारी हार से मत जोड़िए। बहरहाल, आरजेडी जो भी कहे मगर अब तेजस्वी यादव के सामने प्रशांत किशोर होंगे, जो विपक्ष की जमीन पर अपना पांव जमाना चाहेंगे और यही चुनौती रहने वाली है कांग्रेस और तेजस्वी यादव के लिए।
बहरहाल, बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी को 19 हजार 324 वोटों के मार्जिन से हराया है। इस जीत के बाद उन्होंने महत्वपूर्ण बयान दिया है। बांकीपुर को बीजेपी का किला कहे जाने पर प्रशांत किशोर ने कहा इसे बीजेपी का किला कहना तो सही नहीं होगा, यह बीजेपी की मजबूत सीट जरुर थी। जहां से वह लगातार जीतते थे लेकिन किला जनता का होता है।
जनता ही बनाती है, जनता ही हटाती है। बांकीपुर में जातिगत समीकरणों की बात कही जा रही थी लेकिन यहां 422 बूथ थे जिसमें से ज्यादातर बूथों पर जनसुराज जीती है। जिससे तय होता है कि हमें सबका आशीर्वाद मिला है।
प्रशांत किशोर ने बीजेपी को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा श्लोकतंत्र है कभी आप जीतेंगे कभी आप हारेंगे। बीजेपी बांकीपुर में हारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बीजेपी कमजोर हो गई है। बीजेपी का अपना प्रयास जारी रहेगा। वह प्रयास करती रहेगी। इसी तरह से मैंने भी अगर तीन साल तक प्रयास नहीं किया होता, तो क्या आज बांकेपुर की जनता हमें जिताती।
अगर आप प्रयास करेंगे तो आपको आज नहीं तो कल इसका परिणाम दिखेगा। प्रशांत किशोर ने कहा बांकीपुर में जनसुराज की जीत यह दिखाती है हमें जाति, धर्म, दल और नेताओं के प्रति प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर वोट दिया है। मैं पिछले तीन सालों से यही प्रयास कर रहा था जिसे बांकीपुर की जनता ने समझा और जनसुराज को वोट दिया। बांकीपुर की जनता ने जो भरोसा जताया है।
जनसुराज के संस्थापक और बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को शिकस्त देनेवाले प्रशांत किशोर ने अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि बांकीपुर में अहंकार के खिलाफ जनता ने वोट दिया है। यहां जाति से ऊपर उठकर वोटिंग हुई है। लालू प्रसाद की पार्टी का डर दिखाकर पहले बीजेपी वोट लेती थी लेकिन इस बार लोगों ने जनसुराज को मौका दिया है।
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से जनसुराज की जीत के तीन कारण बताए उन्होंने कहा कि पहला कारण है, सम्राट चैधरी का सीएम के तौर पर अस्वकृति, वोट के माध्यम से जनता ने यह संदेश दिया कि बिहार को बेहतर मुख्यमंत्री की जरूरत हैप्रशांत किशोर ने कहा कि इस जीत की दूसरी वजह यह है कि बीजेपी के लोकल नेताओं का अंहकार, उनके अंदर यह भावना थी कि कुत्ता बिल्ली को भी टिकट दे देंगे तो लोग वोट देंगे। इस भावना के खिलाफ लोगों ने वोट दिया।
तीसरा कारण है कि बीजेपी एनडीए के नेता विधायक इस बात को निश्चिंत है कि चुनाव वही जीतेंगे,
अपने काम के आधार पर नहीं बल्कि मोदी के चेहरे पर, हिंदुत्व के नाम पर और कुछ नहीं तो लालू प्रसाद का डर दिखाकर, इन लोगों को जवाबदेह बनाने के लिए लोगों ने वोट दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि इस बार लोगों को बांकीपुर में विकल्प मिल गया, पहले यह विकल्प नहीं था और लोग लालू प्रसाद यादव को वोट देना नहीं चाहते थे,
इसलिए भाजपा को वोट देते थे। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में सुधार चाहिए, भले ही 10 साल लगे, 15 साल लगे, लेकिन बिहार का विकास हर हाल में चाहिए।
अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर



