‘एपस्टीन फाइल्स’ से भारत में सियासी हलचल

अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई जेफरी एपस्टीन से जुड़ी नई “इन्वेस्टिगेटिव फाइल्स” ने दुनिया भर में चर्चा तेज कर दी है। इन्हीं दस्तावेजों में शामिल एक ईमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदर्भ आने के बाद भारत सरकार ने इस पर कड़ा और साफ जवाब दिया है। भारत ने कहा है कि इस ईमेल में प्रधानमंत्री को लेकर जो संकेत दिए गए हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को बताया कि सरकार ने ऐसी खबरें देखी हैं जिनमें “एपस्टीन फाइल्स” के एक ईमेल का जिक्र है। उन्होंने कहा कि ईमेल में प्रधानमंत्री की जुलाई 2017 की इजराइल यात्रा का संदर्भ आता है, जो पूरी तरह आधिकारिक और सार्वजनिक यात्रा थी। इसके अलावा ईमेल में जो अन्य बातें कही गई हैं, उन्हें विदेश मंत्रालय ने दोषी व्यक्ति के आधारहीन विचार बताते हुए खारिज कर दिया।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने एपस्टीन से जुड़े बहुत बड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिलीज में 35 लाख से ज्यादा पन्ने, 2000 से अधिक वीडियो, और लगभग 1.80 लाख तस्वीरें शामिल हैं। यह सामग्री अमेरिका में पारित एक पारदर्शिता कानून के तहत जारी की गई है। अमेरिकी डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि दस्तावेज जारी करना कानून के अनुसार पारदर्शिता की प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके लिए रिकॉर्ड की पहचान व समीक्षा की विस्तृत प्रक्रिया पूरी की गई।
भारत में इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने ईमेल के संदर्भ को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि अगर प्रधानमंत्री का नाम ऐसे विवादित व्यक्ति से किसी भी तरह जुड़ता है, तो यह “निर्णय क्षमता, पारदर्शिता और कूटनीतिक मर्यादा” पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस की मांग है कि इस संदर्भ को स्पष्ट रूप से देखा जाए। हालांकि, भारत सरकार का रुख साफ है। विदेश मंत्रालय ने यह संकेत दिया कि प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा एक सामान्य राजनयिक कार्यक्रम था, और इससे आगे ईमेल में जो बातें जोड़ी गई हैं, वे विश्वसनीय नहीं हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे संदर्भों को बिना पुष्टि के फैलाना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि जेफरी एपस्टीन एक फाइनेंसर था, जिसके कई प्रभावशाली लोगों से संबंधों की चर्चा होती रही। 2019 में न्यूयॉर्क जेल में उसकी मौत हुई थी, जिसे आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया। उस पर सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर आरोप थे। एपस्टीन केस वर्षों से इसलिए भी संवेदनशील रहा है क्योंकि इससे जुड़े दस्तावेजों में कई बड़े नामों का उल्लेख होने की संभावना बताई जाती रही है। फिलहाल भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया यही है कि प्रधानमंत्री को लेकर ईमेल में किए गए संकेतों का कोई ठोस आधार नहीं है। अब आने वाले दिनों में, जैसे-जैसे “एपस्टीन फाइल्स” से जुड़ी और सामग्री सामने आएगी, इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज हो
सकती है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



