ट्रेड वार में मोदी की बड़ी सफलता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ट्रेडवार में डाल-डाल चल रहे थे तो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पात-पात पर चलकर बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। ट्रम्प ने रूस से सस्ता तेल खरीदने के चलते भारत पर 25 फीसद अतिरिक्त आयात कर लगा दिया था। इससे पहले ही 25 फीसद प्रतिस्पद्र्धा कर लगा हुआ था। इस प्रकार भारत से बेची जाने वाली वस्तुओं पर अमेरिका में 50 फीसद टैक्स देना पड़ता था। इससे सबसे ज्यादा वस्त्र उद्योग प्रभावित हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं जताई और बातचीत का रास्ता खुला रखा लेकिन अमेरिका को स्पष्ट बता दिया कि भारत किससे क्या खरीदेगा, इस पर किसी देश को राय देने की जरूरत नहीं है। अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को यह जवाब था कि उसके कहने पर भारत रूस से तेल की खरीद बंद नहीं करेगा। ट्रम्प भी यह बात समझ गये थे और 200 फीसद तक टैरिफ बढ़़ाने की धमकी भी दी थी लेकिन मोदी को वह अच्छी तरह समझते हैं। इसलिये उनको अपना सबसे अच्छा मित्र भी कह रहे थे। ट्रम्प जानते थे कि मोदी खामोश नहीं बैठेंगे और उनकी यह आशंका सच साबित हुई।
मोदी डोनाल्ड ट्रम्प को उनके ही अस्त्र से पराजित करना चाहते थे। भारत ने व्यापार के नये क्षेत्र खोजने प्रारंभ किये। सबसे बड़ी सफलता इसी साल जनवरी के अंतिम दिनों में मिली जब भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) सम्पन्न हुआ। इस समझौते से भारत को यूरोपीय संघ के लगभग 97 फीसद टैरिफ लाइंस (उत्पादों) में अधिमान्य अर्थात प्राथमिकता से पहंुच मिलेगी। यूरोपीय संघ के 26 देशों में भारत के वस़्त्र, चमड़ा, रत्न व आभूषण जैसे उत्पाद शून्य प्रवेश शुल्क पर बेचे जा सकेंगे। यही देखकर ट्रम्प को पसीना आ गया है। उन्होंने कोई भारत पर एहसान नहीं किया है जो प्रति स्पद्र्धा शुल्क के साथ हर्जाने वाला शुल्क भी कम करके 18 फीसद कर दिया है। अब अमेरिका सिर्फ 18 फीसद आयत शुल्क लेगा जो पहले 50 फीसद ले रहा था। ट्रेडवार में मोदी की यह बहुत बड़ी जीत है लेकिन परम्परा निभाते हुए उन्होंने ट्रम्प को इसके लिए धन्यवाद दिया है।
भारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील का इंतजार हो रहा था उसका ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिया है। अमेरिका ने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसद से घटाकर 18 फीसद कर दिया है। सोशल मीडिया पर इस ऐलान से पहले ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात की। इसके बाद ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूस से तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने पर राजी हो गए हैं। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी लिखा है कि जरूरत पड़ी तो भारत वेनेजुएला से तेल लेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई बातचीत को लेकर खुशी जताई है। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप से बात करना शानदार रहा और उन्हें यह जानकर बेहद प्रसन्नता हुई कि अब ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले के लिए भारत की 1.4 अरब जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया और इसे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। ट्रंप ने कहा- मोदी के साथ फोन पर बातचीत में बड़ी ट्रेड डील पर सहमति बनी है। ट्रंप ने मोदी को अपना “महान मित्र” और अपने देश का शक्तिशाली व सम्मानित नेता बताया।
अमेरिका ने भारत पर रूस के तेल खरीदने को लेकर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था। ऐसे में भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी पहुंच गया था। अब व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि अमेरिका 25 फीसदी की पेनाल्टी टैरिफ भी हटा देगा क्योंकि भारत ने रूस से तेल की खरीद को कम किया है। हालांकि व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने याद दिलाया कि समझौता यह है कि भारत रूसी तेल खरीद बंद करेगा, न कि कम करेगा।
ट्रंप ने ये भी दावा किया है कि भारत बाय अमेरिकन नीति के तहत अमेरिका से 500 अरब डॉलर यानि करीब 46 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सामान खरीदेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। हमने व्यापार और रूस व यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने सहित कई विषयों पर चर्चा की। वे रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए। इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी और मैं दो ऐसे व्यक्ति हैं जो काम करके दिखाते हैं, जो कि अधिकांश लोगों के बारे में नहीं कहा जा सकता।
माना जा रहा है कि ट्रम्प के झुकने का बड़ा कारण है। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता। यह दोनों पक्षों द्वारा अब तक किया गया सबसे बड़ा समझौता है। यह विश्व की दूसरी और चैथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक एवं राजनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा। इससे भारत को यूरोपीय संघ के लगभग 97 फीसद टैरिफ लाइंस (उत्पादों) में अधिमान्य पहुंच मिलेगी। इसके तहत व्यापार मूल्य का 99.5 फीसद कवर होगा।
यूरोपीय देशों मंे भारत के वस्त्र, चमड़ा, रत्न व आभूषण जैसे श्रम-गहन क्षेत्रकों को तत्काल शून्य-शुल्क प्रवेश मिलेगा। संवेदनशील क्षेत्रकों की सुरक्षा करते हुए डेयरी, अनाज, कुक्कुट, सोयाबीन मील और कुछ फलों व सब्जियों जैसे क्षेत्रकों को चरणबद्ध उदारीकरण के माध्यम से सुरक्षित रखा गया है। उत्पाद विशिष्ट नियम के माध्यम से स्व-प्रमाणन की सुविधा दी गई है।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में हुए शिखर सम्मेलन में जिस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सहमति बनी है, वह सिर्फ कारोबार से जुड़ी एक उपलब्धि नहीं है, यह वैश्विक शासन (ग्लोबल गवर्नेंस) में एक बदलाव का संकेत देता है, जहां दो बड़े बहुदलीय लोकतंत्र टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता चुन रहे हैं और एकतरफा फैसलों के बजाय कानून के शासन को तरजीह दे रहे हैं।
नेताओं ने इस समझौते को एक परिवर्तनकारी समझौता बताया है, जो बाजार खोलेगा और बाधाएं कम करेगा, लेकिन इस समझौते की असली अहमियत उस साझा शासन के ढांचे में है, जिसे यह स्थापित करना चाहता है। इस समझौते का सबसे साफ असर व्यापार उदारीकरण के रूप में दिखेगा, लेकिन इसका ढांचा सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है इसमें नियमों से जुड़े अध्यायों और उन्हें लागू करने वाली प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ा गया है। भारत-ईयू समझौता नियमों के तालमेल पर जोर देकर 27 ट्रिलियन के भारतीय उद्योग के लिए सप्लायर की भूमिका से बाहर निकलकर मानक तय करने वाले साझेदार बनने का मौका देता है। इसलिए भारत-ईयू के बीच जो समझौता हुआ है, उसने अमेरिकी बाजार को हिला दिया था। ट्रम्प ने उसी की भरपाई की है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



