बुद्धि, विद्या व कला की देवी सरस्वती

तीन महादेवियों में माता सरस्वती का विशिष्ट स्थान है। उन्हें ज्ञान, बुद्धि, विद्या व कला की अधिष्ठात्री माना जाता है। माता सरस्वती की बसंत पंचमी पर विशेष रूप से पूजा की जाती है। बसंत पंचमी का त्योहार हिन्दू महीने के माघ में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार 23 जनवरी को है। ज्ञान के मंदिर अर्थात् शिक्षा संस्थानों मंे माता सरस्वती की पूजा बहुत उत्साह के साथ की जाती है। इसके अलावा सभी हिन्दू परिवारों में भी पीले फूलों और लड्डू का भोग लगाकर माता सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि, विद्या व कला प्रदान करने की याचना की जाती है बसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। यह ऋतु सभी ऋतुओं में मन मोहिनी होती है। खेतों में चारों तरफ सरसों के फूल खिले रहते हैं। फसलों से धरती हरी-भरी दिखती है। माता सरस्वती को पीले पुष्प ही सबसे ज्यादा पसंद हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग शुभ होता है। शादी-व्याह मंे भी पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके अलावा पीला रंग ज्ञान-बुद्धि और सात्विकता का प्रतीक होता है। वसंत पंचमी को युवतियां पीले वस्त्र पहनना शुभ मानती हैं।
हिंदू धर्म में कई त्योहारों को बहुत पावन और पवित्र माना गया है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का भी शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। यह पर्व मुख्य रूप से ज्ञान और विद्या का त्योहार है, जिसमें ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस वर्ष पंचमी तिथि कब मनायी जाएगी, इसे लेकर लोगों में बहुत असमंजस की स्थिति है क्यांेकि 23 और 24 जनवरी पंचमी तिथि पड़ रही है। ज्योतिषाचार्य कहते हैं, किसी भी त्योहार को कब मनाया जाएगा, यह उसकी उदया तिथि पर निर्भर करता है। यदि सूर्य उदय के साथ-साथ या उससे कुछ समय पहल ही उदया तिथि लग जाती है, तो त्योहार उसी दिन मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी को सुबह 2 बज कर 30 मिनट में पर लगेगी और यह 24 जनवरी की सुबह 1 बजकर 40 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस तरह से देखा जाए तो बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। दूसरे दिन शनिवार सूर्य उदय के साथ ही षष्ठी तिथि लग जाएगी। ऐसे में पंचमी तिथि शुक्रवार को पूरे दिन रहेगी। ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजा, बसंत पंचमी के दिन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। यह दिन छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्रोफेशनल्स के लिए भी बहुत मायने रखता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में देवी सरस्वती की पूजा करने पर बहुत लाभ प्राप्त होता है।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह दिन देवी सरस्वती को समर्पित है और इस दिन संगीत, साहित्य और कला से जुड़े लोगों को जरूर उनकी अराधना करनी चाहिए। इसके साथ ही सरस्वती पूजा के दिन बच्चों को अक्षर ज्ञान देना बहुत ज्यादा जरूरी है। इस दिन से आप अपने बच्चे की पढ़ाई की शुरुआत करा सकते हैं। इस दिन पीले कपड़े पहनने का भी महत्व है, क्योंकि बसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन होता है, इसलिए इस दिन घर में पीले पकवान बनते हैं, पीले फूल से घर सजाया जाता है।
ज्योतिषियों के अनुसार वसंत पंचमी पर लाभ चैघड़िया सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 53 मिनट तक। अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होकर 12 बजकर 54 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। अमृत चैघड़िया सुबह 9 बजकर 53 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 53 मिनट तक। इस प्रकार शुभ मुहूर्त में पूजा करें।
बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ मास की शुक्ल पंचमी के दिन पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ऋतुओं में परिवर्तन होता है। साथ ही मौसम भी बदलने लगता है। इस दिन मां सरस्वती जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, विघा और कला की देवी कहा जाता है। उनकी पूजा की जाती है। यह पूजा स्कूल से लेकर घरों में पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। हर तरह पीले वस्त्र और पीले फूलों का रंग दिखाई देगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले रंग के फूल क्यों चढ़ाए जाते हैं? साथ ही इसका धार्मिक महत्व क्या होता है, ताकि आप भी इसके बारे में अच्छे से जान सके। बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हुए नजर आते हैं और चारों ओर प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है। पीला रंग उमंग, खुशी, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। यही कारण है कि इस पर्व पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। इस रंग के फूल आपको बसंत पंचमी के दिन हर तरफ देखने को मिल जाएंगे।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग ज्ञान, बुद्धि और सात्विकता का प्रतीक मानाजाता है।
मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो शांति का संकेत होता है, लेकिन बसंत पंचमी पर उन्हें पीले फूल अर्पित करने से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि पीले फूल मां सरस्वती को सबसे ज्यादा प्रिय होते हैं। ऐसे में आप भी मां सरस्वती का आशीर्वाद पाने के लिए इन फूलों को चढ़ा सकते हैं। साथ ही अपने बच्चों के हाथों से भी पुष्प अर्पित कराएं। ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले रंग के प्रसाद से की गई पूजा से विद्या, वाणी और विवेक का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विद्यार्थी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा करते हैं, ताकि पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिले। वहीं घरों में इनकी पूजा सकारात्मकता के लिए की जाती है। इसलिए माता सरस्वती को आशीर्वाद प्राप्त करें। मां सरस्वती को चढ़ाने के लिए आप सरसों के फूल, गेंदे के फूल या पीले गुलाब को अर्पित कर सकती हैं। इन फूलों को पूजा में शामिल करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीले फूल चढ़ाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व है। पीला रंग ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। (चक्षु स्वामी-हिफी फीचर)



