लेखक की कलम

भ्रष्टाचार पर योगी का प्रहार

सरकार और शासन मंे कभी-कभी कठोर कदम उठाना बहुत जरूरी हो जाता है। उत्तर प्रदेश मंे योगी आदित्यनाथ यह बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। उनकी सरकार का बुलडोजर सिर्फ अपराधियांे पर ही नहीं चलता बल्कि भ्रष्टाचारियों को भी जमींदोज कर देता है अभी 2 फरवरी को योगी सरकार ने भ्रष्टचार उन्मूलन की जीरो टालरेंस नीति के तहत प्रदेश के 68 हजार राज्य कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। इनका वेतन इसलिए रोका गया कि सरकार की पारदर्शिता नीति पर इन्हांेने अमल नहीं किया। सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों से 31 जनवरी तक अपनी-अपनी सम्पत्ति का ब्योरा मांगा था। सरकार के इस आदेश को नजरंदाज करने वाले 68 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया। सरकारी कर्मचारी अपनी चल-अचल सम्पत्ति का ब्योरा दें, इससे जनता के बीच अच्छा संदेश भी जाएगा और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। सरकार इस तरह के मामलों मंे कभी-कभी असहज हो जाती है। अभी पिछले दिने दिनों बुंदेलखंड के एक विधायक ने कई ग्राम प्रधानों के साथ मंत्री के काफिले को रोका और आरोप लगाया कि जीवन मिशन स्कीम में घोटाला हुआ है। इस तरह के आरोप सरकारी कर्मचारियों की निष्ठा पर सवाल खड़े करते हैं।
सवाल यूं ही नहीं उठते। पारदर्शिता का अभाव है। यूपी के 68,236 राज्यकर्मियों का जनवरी 2026 का वेतन रोक दिया गया है। वेतन रोकने की वजह ये है कि इन कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। यूपी में 8,66,261 राज्य कर्मचारी हैं। योगी सरकार ने सभी राज्य कर्मचारियों को 31 जनवरी तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देने के आदेश दिए थे। कर्मचारियों को ये ब्यौरा मानव संविदा पोर्टल पर 31 जनवरी तक अपलोड करना था, लेकिन 68,236 कर्मचारियों ने संपत्ति न बताने वाले सबसे ज्यादा 34,926 कर्मचारी तृतीय श्रेणी के हैं। इसमें 22,624 राज्यकर्मी चतुर्थ श्रेणी, 724 द्वितीय श्रेणी और 2628 प्रथम श्रेणी के कर्मचारी हैं।
गौरतलब है कि योगी सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरी टॉलरेंस की नीति अपनाने के लिए जाना जाता है। सीएम योगी खुद भी बहुत सादा जीवन जीते हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाईयां की हैं। इसमें बुलडोजर वाली कार्रवाई सबसे अहम है। इसीलिए उन्हें बुलडोजर बाबा भी कहा जाता है। योगी सरकार का संदेश साफ है कि जब तक राज्य कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देते, तब तक उनका वेतन रिलीज नहीं किया जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से राज्य कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। जानकारों द्वारा कहा ये भी जा रहा है कि सरकार द्वारा वेतन रोकना अंतिम कार्रवाई नहीं है। अगर जल्द ही राज्य कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकार को नहीं दिया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में जुटी है। इसी को लेकर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। दरअसल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों से संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। कुछ ने ब्यौरा दे भी दिया, जबकि 68 हजार कर्मचारियों ने सरकार के इस आदेश पर गौर नहीं किया। इसीलिए योगी सरकार ने आदेश का उल्लंघन करने वाले करीब 68 हजार कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है। सरकार का आदेश है कि जब तक ये कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देते हैं तब तक उन्हें सैलरी नहीं दी जाएगी। इससे पहले मुख्य सचिव के स्पष्ट आदेश पर सभी ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा 31 जनवरी तक नहीं दिया था। माना जा रहा है कि सभी कर्मचारी अब सरकार के एक्शन के बाद जल्द ही अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकार को दे देंगे।
भ्रष्टाचार की शिकायत कर्मचारियों के खिलाफ भाजपा के विधायक भी करते हैं। उत्तर प्रदेश के चरखारी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक ब्रजभूषण राजपूत का योगी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को 30 जनवरी, 2026 को बीच सड़क पर रोकना राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख विषय बन गया है। दरअसल, भाजपा विधायक ब्रजभूषण राजपूत करीब 100 ग्राम प्रधानों और समर्थकों के साथ मंत्री से मिलने और जल जीवन मिशन योजना की खामियों को बताने पहुंचे थे। ऐसे में इस घटना के बाद विपक्षी दल के नेताओं ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तंज भी किया।
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को भाजपा विधायक ने बीच सड़क पर घेर कर उनके विभाग में हो रहे जुबानी विकास और भ्रष्टाचार की शिकायत की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, महोबा जिले में एक दिवसीय भ्रमण पर गये स्वतंत्र देव सिंह का युवा उद्घोष कार्यक्रम से लौटते समय भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत और उनके समर्थकों ने काफिला रोक लिया। इस दौरान विधायक व उनके समर्थकों ने जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की बदहाली बताई। विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई। शहर के रामश्री महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद मंत्री का काफिला लौट रहा था। तभी कलक्ट्रेट मार्ग पर बड़ी संख्या में भाजपा विधायक व समर्थकों ने काफिला रोका। सीओ सदर अरुण कुमार सिंह और एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने मामले को नियंत्रण में किया। रास्ते से गाड़ी हटवाने के लिए स्वतंत्रदेव को खुद नीचे उतरकर आना पड़ा। इस दौरान विधायक से उनकी तीखी नोकझोंक हुई।
काफी मशक्कत के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए समर्थकों को सड़क से अलग कराया और काफिला आगे बढ़वाया। भाजपा विधायक के साथ बड़ी संख्या में प्रधान भी पहुंचे। जिनका कहना था कि जल जीवन मिशन से खोदी गई सड़कों की दशा खराब है, जिन्हें आजतक दुरुस्त नहीं कराया गया। साथ ही, कई गांवों में अभी तक पानी नहीं पहुंच रहा है। तीन साल से समस्या बरकरार है। एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने बताया कि विधायक के समर्थकों ने समस्या बताने के लिए जलशक्ति मंत्री के काफिले को रोका था।
काफिला रोकने के बाद चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव के बीच बातचीत हुई। मंत्री ने कहा कि जहां कोई शिकायत है, वहां मुझे लेकर चलो। उस गांव में मैं खुद चलता हूं। 40 गांवों में कहोगे तो मैं सभी जगह चलूंगा। मेरे साथ विभागीय अधिकारी भी हैं। सड़कें खुदी मिली, लापरवाही हुई होगी तो अफसरों को सस्पेंड कर दूंगा। आप मेरे साथ मेरी गाड़ी में चलिए। काफिला रोकने और झड़प के बाद जब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत को अपनी गाड़ी में बैठाया।
इस दौरान विधायक के समर्थकों की इंस्पेक्टर से झड़प हो गई। समर्थकों का कहना था कि पूरी बात हो जाएगी, वह तभी जाएंगे। बता दें कि उससे पहले अयोध्या में एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रभारी मंत्री
सूर्य प्रताप शाही के सामने भाजपा
जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता में धक्का मुक्की हुई थी।
पिछले साल बदायूं में भ्रष्टाचार को लेकर धर-पकड़ हुई थी। एंटी करप्शन की टीम ने दस दिन में दूसरे भ्रष्टाचारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इससे पहले 21 जनवरी को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते लेखपाल गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2025 में 25 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया। 1 जुलाई को चैकी इंचार्ज दानपुर धर्मवीर सिंह को एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा। उन पर शिकायती पत्र के आरोपी को धमकाने का आरोप था। उन्होंने 20 हजार रुपये में मामला निपटाने को कहा था, लेकिन बाद में बात 10 हजार रुपये में तय हो गई। पीड़ित मनोज कुमार ने एंटी करप्शन टीम को सूचना दे दी। 11 जुलाई 2025 को चैकी इंचार्ज रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिए गए। इसी प्रकार 21 जनवरी को बिसौली में लेखपाल तो शुक्रवार को बिजली विभाग का जेई टीम को रिश्वत लेते मिल गया था।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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